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पेट में आंव बनने के कारण ( Dysentery )

 पेट में आंव बनने के कारण और उपचार :

दोस्तों नमस्कार !!

आज की इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसी बीमारी का सटीक इलाज बताने जा रहे हैं जिसे लोग बहुत से इलाज लेने के बावजूद ठीक नहीं हो पाती जिसे लोग आँव या पेंचिश कहते हैं।
आपको इसके होने के कारण और किन वायरस के कारण होती है वो भी बताएंगे और अंत में इसका घरेलू इलाज भी बताएंगे।

पेट में आंव बनना क्या होता है ? :

यह रोग पेट की आंतों का संक्रमण वाला रोग होता है,जिसमें खून और बलगम वाले दस्त लगते हैं। पेंचिस बहुत तेजी से बढ़ने वाली बीमारी होती है।इससे बचने के लिए आपको पर्याप्त सावधानी बरतनी होगी, जैसे की किसी भी वस्तु को छूने या शौच के बाद साबुन से हाथ धोना आदि।
यह संक्रमण बैक्टीरिया या पैरासायटिस से होता है। अगर यह संक्रमण अमीबा के कारण होता है तो अन्य परेशानियों के साथ गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

पेट में आंव बनने के कारण
पेट में आंव बनने के कारण


अमीबा एक प्रकार के पैरासायटिस होते हैं जो दूषित खाद्य और पानी में पाए जाते हैं। ये हमारे शरीर में तब घुसते हैं जब हम दूषित भोजन और दूषित पानी का सेवन कर लेते हैं।

पेट में आंव बनने के लक्षण :

पेंचिश लगने पर पेट में ऐंठन होती है, बार बार पाखाना जाने की हाजत होती है। जब भी शौच जाते हैं तो पेट में दर्द और बलगम मिला हुआ पाखाना आता है। अधिक दिन होने पर बलगम के साथ खून भी आने लगता है। जब खून आने लगे तो किसी भी डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी हो जाता है। 

पेट में आंव क्यों हो जाती है ? :

दोस्तों, पेंचिश या आंव  दूषित खाने और पानी के कारण हो जाती है अतः खाने और पीने में हमेशा सावधानी बरतें। भोजन और पानी मानव मल से दूषित हो चुका है उसे संक्रामक जीव संक्रमित कर देता है। कई बार संक्रमित लोगों द्वारा बिना हाथ धोए, भोजन या पानी को छू लेने मात्र से भोजन दूषित या संक्रमित हो जाता है।
अमीबिक पेंचीश उन लोगों के द्वारा फैलता है जो इस बीमारी से ग्रस्त होता है, परंतु उस समय उनमें कोई लक्षण नहीं दिखाई देते। यह रोग आमतौर पर वहां अधिक पाया जाता हैं जहां लोग भीड़ में रहते है तथा साफ सफाई की सुविधाएं कम होती हैं। यह बीमारी निम्न कारण से फेल सकती है :

1.दूषित खाद्य पदार्थ

2. दूषित पानी और अन्य पेय पदार्थ 

3. संक्रमित लोगों द्वारा हाथ ठीक तरह से न धोना।

4. संक्रमित पानी जैसे नदी, तालाब या ट्यूबवेल का पानी, झील, गंगा में नहाना।

5. शारीरिक संपर्क ।

पेट में आंव बनने की रोकथाम कैसे करें ?  :

इसकी रोकथाम के कई उपाय हैं मगर सबसे अच्छा उपाय खाने या पीने दौरान हाथों को साफ अवश्य करें।
अगर आप पेंचिश से संक्रमित हैं तो आप अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं।
बीमारी को अन्य लोगों में फैलने से रोकने के लिए निम्न कदम उठाए जा सकते हैं :

1. शौच के उपरांत हमेशा अपने हाथों को अच्छे से धोएं।

2. अगर आप में इनके लक्षण हैं तो यौन सम्पर्क न बनाएं।

3. खाद्य पदार्थों को ठंडा होने से पहले ही खाएं।
पके हुए खाद्य पदार्थों को कच्चे खाद्य पदार्थों से बचाकर रखें।

4. उन खाद्य पदार्थों को ही खाएं जिन्हे उच्च तापक्रम पीआर पकाया गया हो। खाद्य पदार्थ ठंडे या बड़ी होने पर न खाएं।

5. उबले पानी को ही पिएं।

6. शरीर में संक्रमण होने पर न तो किसी को छुएं और न हीं उनके साथ लेटें, स्कूल और ऑफिस जाना 48 घंटे तक न जाएं।

7. ट्रीटमेंट तुरंत लें ।

आंव या पेंचिस का इलाज :

1. जब भी ऐसा लगे कि आप संक्रमित हैं तो तुरंत रोटी सब्जी का त्याग करें हैं इसके स्थान पर मूंग की दाल और चावल से बनी खिचड़ी में दही मिलाकर खाएं।

2. तोरई के साफ पत्तों का रस निकाल कर उसमें दही मिला कर खाएं।

3. काली मकोय के पत्तों का रस निकाल कर बकरी के दूध में मिलाकर पिएं यह प्रयोग छोटे बच्चों को बहुत फायदा करता है। सुबह शाम पिलाने से ही यह रोग जड़ से चला जाता है। परंतु रोग की तीव्रता के अनुसार अधिक बार दोहराना चाहिए।

4.छोटी दूधिया जो नदी नालों के किनारे पाई जाती है जिसे तोड़ने पर सफेद दूध जैसा पदार्थ निकलता है को पीस कर मिसरी मिला कर खाएं।

आंव या पेंचिश का एलोपैथिक उपचार :

Tabs. Entroquinol 1
Tabs.OZ 1/2 
Tabs. Gassex 1

यह एक खुराक है। इसको सुबह शाम लेने से पेट के अंदर बनी हुई आंव बाहर निकल जाती है और रोगी 2 से 3 दिन में ठीक हो जाता है।

इस प्रकार से है हम जान चुके हैं कि पेट में आंव बनने के कारण, आंव होने के लक्षण, पेंचिश होने 
और उसकी रोकथाम तथा इसका इलाज आदि की जानकारी हमने आपको दी है।

इस प्रकार से हमने जाना पेट में आंव बनने के कारण क्या है, इसके तहत पेट में आंव बनना क्या होता है, आँव बनने के कारण, आँव बनने के उपचार, खानपान तथा क्या खाएं क्या न खाएं, एलोपैथिक उपचार आदि के बारे में विस्तृत जानकारी।

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